इंदौर। देवी अहिल्या श्रमिक कामगार सहकारी संस्था के सदस्यों को लगता है इस बार भी न्याय नहीं मिलने वाला। सहकारिता विभाग के नोटिस और कलेक्टर की चेतावनी के बाद भी समय सीमा में सूची के वेरिफिकेशन की कोई कोशिश नहीं दिख रही। संस्था के एक सदस्य ने वीडियो जारी कर सवाल उठाए हैं कि जब दफ्तर खाली है, अध्यक्ष के केबिन पर ताला लगा है, तो आखिर सूची कहां बन रही है?
संस्था के सदस्यों के बीच एक वीडियो खूब चल रहा है। इस वीडियो के साथ लिखा गया है- लगता है, इस आफिस के अलावा अन्य किसी जगह आफिस वर्क हो रहा है। क्योंकि ऑफिस के पास कार्यालय में जो तीन व्यक्ति बेठे हैं, उन्हें किसी बात की जानकारी ही नहीं है। कब ऑफिस खुलता है, कब मेंबर आते हैं। कुछ काम का पूछा तो उन्हें कोई जानकारी नहीं है। अध्यक्ष, उपाध्यक्ष,संचालक मंडल के अन्य सदस्य कोई उपलब्ध नहीं हैं। कलेक्टर साहब के दिए हुए टाइम को ऐसे ही व्यर्थ करके किसे खुश करना चाहते हैं?
हो-हल्ला मचा तो संचालकों को लिखी चिट्ठी
कलेक्टर की चेतावनी के बाद भी देवी अहिल्या संस्था के अध्यक्ष विमल अजमेरा सूची को लेकर गंभीर नहीं हुए। पिछले सप्ताह एक बैठक बुलाकर इस्तीफे की पेशकश की, रजिस्टर के मिनिट्स में भी लिख दिया, लेकिन यह कहकर इस्तीफा नहीं दिया कि सारे सदस्य नहीं हैं। उस समय छह सदस्य उपस्थित थे, सिर्फ अजमेरा के करीबी तीन सदस्य ही नहीं आए थे। अजमेरा ने इन सदस्यों से कहा कि अगले दिन बैठक में इस्तीफा दे देंगे, लेकिन अगले दिन बैठक ही नहीं हुई। इसके बाद सूची अपने करीबी अपात्र सदस्यों से तैयार करवाते रहे। जब हो-हल्ला मचा तो अब संचालक मंडल को पत्र लिखकर सूची बनवाने में सहयोग करने को कहा है।
फर्जी सूची पर हस्ताक्षर करने को कोई तैयार नहीं
संचालक मंडल के सदस्य अब अजमेरा द्वारा फर्जी सूची पर हस्ताक्षर करने को तैयार नहीं है। इसलिए पत्र भेजने के बाद भी कोई नहीं आ रहा। कुछ सदस्यों का कहना है कि कलेक्टर की चेतावनी के बाद भी अजमेरा गंभीर नहीं हुए और अपने स्तर पर सूची बनाते रहे। अब जबकि समय नहीं बचा है, चाहते हैं कि उनकी बनाई सूची पर हस्ताक्षर कर दें। ऐसे में गड़बड़ियों की जिम्मेदारी कौन लेगा?
22 जून को मिला था 15 दिन का अल्टीमेटम
उल्लेखनीय है कि हाईकोर्ट के आदेश पर कलेक्टर द्वारा गठित समिति ने विमल अजमेरा को पात्र सदस्यों की सूची पिछले साल ही भेज दी थी। अजमेरा और उनके संचालक मंडल को इसे वेरिफाई कर विभाग में भेजना था, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। इसके बाद सहकारिता विभाग ने उन्हें नोटिस भेजा, लेकिन अजमेरा अपने खास लोगों के प्लॉट की रजिस्ट्री कराने की सिफारिश करते रहे। इसके बाद कलेक्टर आशीष सिंह ने 22 जून को एक बैठक बुलाकर अजमेरा को जमकर फटकार लगाते हुए 15 दिन में सूची वेरिफाई कर नहीं भेजने पर एफआईआर की चेतावनी दी थी।


