धार्मिक विवाद में फंसी इजराइली सरकार: नेतन्याहू का गठबंधन अल्पमत में, राजनीतिक अस्थिरता गहराई

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धार्मिक विवाद में फंसी इजराइली सरकार: नेतन्याहू का गठबंधन अल्पमत में, राजनीतिक अस्थिरता गहराई

ईरान, सीरिया और फिलिस्तीन जैसे इस्लामिक देशों के साथ युद्ध झेल रहे इजराइल में अब आंतरिक राजनीतिक संकट भी गहराता जा रहा है। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की सरकार अल्पमत में आ गई है, क्योंकि उनकी गठबंधन सहयोगी शास पार्टी ने समर्थन वापस ले लिया। इससे एक दिन पहले यूनाइटेड टोरा जूडाइज्म (UTJ) पार्टी ने भी गठबंधन से अलग होने की घोषणा की थी।

ईरान नहीं, नेतन्याहू को अपनों ने लूटा... आखिर क्या है हरेदी ड्राफ्ट बिल जिस  पर इजराइल में छिड़ा विवाद | Netanyahu haredi draft bill israel government  crisis

120 सीटों वाली इजराइली संसद में सरकार बनाने के लिए कम से कम 61 सीटों की ज़रूरत होती है। दोनों दलों के समर्थन वापस लेने के बाद सत्तारूढ़ गठबंधन के पास अब सिर्फ 50 सीटें बची हैं।

क्यों टूटा गठबंधन?

गठबंधन टूटने की वजह एक संवेदनशील धार्मिक मुद्दा बना — अल्ट्रा-ऑर्थोडॉक्स (अति रूढ़िवादी) यहूदी छात्रों को अनिवार्य सैन्य सेवा से मिलने वाली छूट।
नेतन्याहू सरकार ने हाल ही में इस छूट को सीमित करने का प्रस्ताव रखा था, जिसके विरोध में शास और UTJ ने सरकार से दूरी बना ली।

शास पार्टी ने कहा,
भारी मन से हमें यह स्वीकार करना पड़ रहा है कि हम अब सरकार का हिस्सा नहीं रह सकते। हालांकि हम सरकार को अस्थिर करने का प्रयास नहीं करेंगे और कुछ कानूनों पर समर्थन दे सकते हैं।”

धार्मिक बनाम राष्ट्रहित की बहस

दोनों दलों का कहना है कि धार्मिक छात्रों को सेना में भर्ती करने से उनकी धार्मिक जीवनशैली को खतरा होता है।
लेकिन, दूसरी ओर, युद्ध के हालात में कई यहूदी इजराइली इस छूट को “विशेषाधिकार” मानते हैं और इसके विरोध में हैं। गाजा युद्ध में सैकड़ों सैनिकों की मौत के बाद यह नाराजगी और गहरी हो गई है। कई लोगों का मानना है कि अल्ट्रा-ऑर्थोडॉक्स समुदाय युद्ध की ज़िम्मेदारी से पीछे हट रहा है।

सरकार गिरेगी या अस्थिरता बढ़ेगी?

विशेषज्ञों का मानना है कि यह विवाद नेतन्याहू सरकार को तुरंत नहीं गिराएगा, लेकिन इससे इस्राइल की राजनीति में भारी अस्थिरता जरूर आ सकती है।
गाजा में युद्धविराम को लेकर चल रही बातचीत, और लेबनान व सीरिया में जारी संघर्षों के बीच, नेतन्याहू को अंदर और बाहर — दोनों मोर्चों पर कड़े राजनीतिक संकट का सामना करना पड़ रहा है।

Abhilash Shukla (Editor)
Abhilash Shukla (Editor)http://www.hbtvnews.com
Abhilash Shukla is an experienced editor with over 28 years in journalism. He is known for delivering balanced, impactful, and credible news coverage.

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