सराफा व्यापारी कह रहे हैं-दुकान मेरी, ओटला मेरा, टैक्स मैं भरता हूं और महापौर तय करेंगे उस पर कौन बैठेगा?

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इंदौर। सराफा चौपाटी हटाने का मामला अब और तूल पकड़ता जा रहा है। व्यापारी लगातार सराफा चौपाटी का विरोध कर रहे हैं और महापौर उसे नहीं हटाने की जिद पर अड़े हुए हैं। खुद को शोले का ठाकुर कहने वाले इंदौर के मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने भी अपने हाथ खड़े कर दिए और व्यापारियों से कहा कि आप लोग बहुत आगे बढ़ गए हो, फैसला महापौर ही करेंगे। ठाकुर के कहने पर सोमवार यानी कल फिर से महापौर के साथ व्यापारियों की बैठक हो रही है।

सराफा व्यापारियों का कहना है कि दुकान उनकी है, ओटला उनका है, टैक्स भी वे भरते हैं, तब महापौर को क्या अधिकार कि वे यह तय करेंगे कि ओटले पर कौन बैठेगा? व्यापारी किसी भी हाल में सराफा चौपाटी चलने देने के पक्ष में नहीं है। व्यापारियों का कहना है कि जब महापौर द्वारा बनाई गई कमेटी ने भी चौपाटी को खतरा बताकर इसे हटाने की सिफारिश की थी, इसके बाद भी इसे नहीं हटाने की जिद समझ से परे है।

नगर निगम की कमेटी ने माना था खतरा

महापौर का कहना है कि सराफा चौपाटी इंदौर की पहचान है, इसे यहां शिफ्ट नहीं किया जा सकता। ऐस बयान देते वक्त महापौर यह तथ्य क्यों भूल रहे हैं कि पिछले साल उनकी ही बनाई समिति ने सराफा चौपाटी को खतरा बताते हुए उसे हटाने का सुझाव दिया था। समिति ने अपने प्रतिवेदन में कहा कि सभी तथ्यों पर विचार करने पर सराफा चौपाटी बाजार में आगजनी, अन्य दुर्घटनाओं तथा जनहानि की संभावना है। वर्तमान में लगभग 200 दुकाने चौपाटी में लगाई जाती है, जिसमें गैस सिलेंडरों का उपयोग किया जाता है। सराफा चौपाटी में प्रतिदिन होने वाली भीड़ जिसमें महिलाएं, बच्चे रहते हैं, विशेषकर शनिवार और रविवार को होने वाली भीड़ को देखते हुए दुर्घटना तथा जनहानी हो सकती है, इसका ध्यान रखना आवश्यक है। इसके साथ ही कमेटी ने इसे अन्य जगह शिफ्ट करने के सुझाव के साथ ही कई स्थानों के नाम भी सुझाए थे।

क्या अब भाजपा को व्यापारियों की जरूरत नहीं

सराफा चौपाटी का विरोध व्यापारियों के साथ रहवासी भी लगाता कर रहे हैं। विरोध का आलम यह है कि राजवाड़ा के आसपास के दर्जनों बाजारों के व्यापारी संगठन इसे हटाने की मांग कर रहे हैं। इनमें शक्कर बाजार व्यापारी एसोसिएशन, एम.टी.एच. क्लॉथ मर्चेंट एसोसिएशन, इंदौर चांदी सोना जवाहरात दलाल एसोसिएशन, सीतलामाता बाजार व्यापारी एसोसिएशन, राजवाड़ा चौक व्यापारी एवं रहवासी संघ, पीपली बाजार एसोसिएशन, गोपाल मंदिर राजबाड़ा व्यापारी एसोसिएशन, बोहरा बाजार व्यापारी संघ, इंदौर रिटेल गारमेंटस एसोसिएशन, सांठा बाजार वस्त्र व्यापारी संघ, बजाज खाना चौक, उदापुरा व्यापारी एसोसिएशन, श्री मारोठिया बाजार व्यापारी संघ सहित कई संगठन नगर निगम को पत्र देकर इसका विरोध कर चुके हैं। इसके बावजूद महापौर इसे नहीं हटाने की जिद पर अड़े हैं। अब तो भाजपा में कहा जा रहा है कि जिन व्यापारियों के दम पर भाजपा इस मुकाम तक पहुंची है, महापौर अब उन्हें नाराज कर रहे हैं। क्या भाजपा को अब व्यापारियों के समर्थन की जरूरत नहीं।

पैसे के लेनदेन की भी चर्चा

सूत्र बताते हैं कि सराफा चौपाटी की 80 दुकानों से 111 दुकानों की लिस्ट बनाने के लिए व्यापारियों से चंदे के रूप में रकम वसूली जा रही है। प्रति दुकान ढाई लाख रुपए में सौदा तय हुआ है। पहली किस्त 51 हजार रुपए तय हुई और लिस्ट फाइनल होने के बाद दो लाख रुपए और देने हों। कुछ व्यापारी ऐसे भी हैं, जो छह महीने पहले सराफा आए हैं। उनका भी नाम होने की संभावना। गुरुवार रात सराफा व्यापारी और चौपाटी व्यापारी की बैठक हुई थी। बताया जा रहा है कि लेनदेन की चर्चा हुई थी।

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