देवी अहिल्या सहकारी संस्था के अध्यक्ष विमल अजमेरा निष्कासित, बार-बार आदेश के बाद भी ऑडिट नहीं करवाने पर सहकारिता विभाग ने लिया एक्शन

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इंदौर। वर्षों से विवादित देवी अहिल्या श्रमिक कामगार सहकारी संस्था के अध्यक्ष विमल अजमेरा को सहकारिता विभाग ने आज यानी सोमवार को निष्कासित कर दिया है। विभाग द्वारा बार-बार आदेश देने के बावजूद वे न तो संस्था का ऑडिट करा रहे थे और न ही हिसाब-किताब दे रहे थे। विभाग ने फिलहाल संस्था के वरिष्ठ उपाध्यक्ष पंकज जायसवाल को अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंप दी है।

उल्लेखनीय है कि सहकारिता विभाग और जिला प्रशासन के बार-बार निर्देशों के बाद भी विमल अजमेरा संस्था के कामकाज के प्रति गंभीर नहीं हो रहे थे। हाईकोर्ट के आदेश पर तत्कालीन कलेक्टर ने श्री महालक्ष्मीनगर और अयोध्यापुरी के सदस्यों की वरीयता सूची तय करने के लिए एक कमेटी बनाई थी। इस कमेटी द्वारा तैयार की गई सूची सहकारिता विभाग द्वारा सौंपे जाने के बाद भी अजमेरा फाइनल सूची तैयार नहीं कर रहे थे। कलेक्टर की चेतावनी के बाद हाल ही में उन्होंने सूची फाइनल की, लेकिन उसमें भी गंभीर गड़बड़ियों की शिकायतें मिलीं।

सहायक रजिस्ट्रार ने जारी किया आदेश

सहायक रजिस्ट्रार (अंके.) सहकारी संस्थाएं एपीएस बिलोदिया ने सोमवार 22 सितंबर को इस संबंध में पत्र जारी किया है। इसमें उन्होंने विभाग द्वारा भेजे नोटिसों का हवाला देते हुए अजमेरा द्वारा की गई गड़बड़ियों का भी जिक्र किया है। इसमें साफ लिखा है कि अजमेरा ने विभाग के बार-बार लिखने के बाद भी संस्था का अधूरा हिसाब-किताब दिया। यहां तक कि अंकेक्षकों भी डाक्यूमेंट उपलब्ध नहीं कराए। इतना ही नहीं विभाग के पत्रों का संतोषजनकर उत्तर भी नहीं दिया।

तीन वर्ष के लिए हुआ निष्कासन

बिलोदिया ने अपने आदेश में लिखा है कि सतत् रूप से वैधानिक जारी नोटिसों के चूककर्ता के रूप में पाते हुए धारा 56 (3) के तहत देवी अहिल्या श्रमिक कामगार सहकारी संस्था मर्या, इन्दौर के अध्यक्ष विमल अजमेरा को संचालक पद से 03 वर्ष के लिए निर्रहित घोषित किया जाता है। संचालक के पद से हटने के साथ ही इन्हें अध्यक्ष पद से भी हटा दिया गया है।

विभाग ने अजमेरा पर यह भी आरोप लगाए

आदेश में कहा गया है कि नियमानुसार सोसायटी का दायित्व है कि प्रत्येक सोसायटी ऐसे अभिलेख, रजिस्टर तथा लेखा पुस्तकें बनाए रखेगी तथा रजिस्ट्रार को ऐसी जानकारी तथा ऐसी विवरणियां देगी जिनकी कि उसके व्दारा समयसमय पर अपेक्षा की जाए। संस्था द्वारा वर्ष 2007-08 से लगाकर 2024-25 के वित्तीय पत्रक एवं विवरणियां निर्धारित समयावधि में कार्यालय में प्रस्तुत नहीं की। इतना ही नहीं उपरोक्त वर्षों के अंकेक्षण हेतु अंकेक्षकों को रेकार्ड भी उपलब्ध नहीं कराया गया। इस प्रकार संस्था व्दारा .प्र.सहकारी सोसायटी अधिनियम 1960 एवं संस्था की पंजीकृत उपविधियों के व्दारा निर्धारित कर्तव्यों एवं दायित्वों का पालन करने में निरन्तर चूक की जा रही है। विभाग ने 03 सितंबर 2025 को नोटिस देकर अंकेक्षण कराये जाने के संबंध में युक्तियुक्त अवसर प्रदान करते हुए जवाब प्रस्तुत करने हेतु निर्देशित किया गया। उक्त सूचना पत्र के अनुक्रम में अजमेरा ने अपूर्ण वित्तीय पत्रक प्रस्तुत किए। वह भी निर्धारित समयावधि के बाद प्रस्तुत किए गए तथा व्यक्तिगत सुनवाई के लिए निर्धारित तारीख पर भी अजमेरा नहीं पहुंचे।

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