पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष दिन-ब-दिन और उग्र होता जा रहा है। तनाव कम करने की तमाम कोशिशें अब तक नाकाम रही हैं। हाल ही में अमेरिकी लड़ाकू विमानों को मार गिराए जाने और एक पायलट के लापता होने की घटनाओं ने स्थिति को और गंभीर बना दिया है। यदि यह पायलट ईरान के हाथ लग जाता है, तो डोनाल्ड ट्रंप की चिंताएं और बढ़ सकती हैं।
करीब पांच सप्ताह से ईरान के साथ चल रहे संघर्ष के बीच अमेरिका को बड़ा झटका लगा है। एक ही दिन में दो अलग-अलग घटनाओं में अमेरिकी वायुसेना को नुकसान उठाना पड़ा। ईरानी सेना ने एक अमेरिकी F-15E लड़ाकू विमान को मार गिराया, जिसमें दो पायलट सवार थे। इस हादसे में एक पायलट को सुरक्षित बचा लिया गया, जबकि दूसरा अभी भी लापता है और उसकी तलाश जारी है।
इसी दिन एक अन्य घटना में अमेरिकी A-10 वारथोग हमला विमान कुवैत के ऊपर दुर्घटनाग्रस्त हो गया। हालांकि इस विमान का पायलट सुरक्षित रूप से बाहर निकलने में सफल रहा और बाद में उसे बचा लिया गया। लगातार हुई इन घटनाओं ने संघर्ष की शुरुआत के बाद अमेरिकी वायुसेना को लगे सबसे बड़े झटकों में से एक को जन्म दिया है।
लापता पायलट की तलाश के लिए चलाया गया बचाव अभियान भी जोखिम भरा साबित हुआ। रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिकी ब्लैकहॉक हेलीकॉप्टर जब ईरानी क्षेत्र में खोज के लिए पहुंचे, तो उन पर भी गोलाबारी हुई। हालांकि वे किसी तरह सुरक्षित लौटने में सफल रहे। इस मिशन के दौरान एक पायलट को बचा लिया गया, लेकिन हेलीकॉप्टरों के क्षतिग्रस्त होने की आशंका जताई जा रही है।
ईरान रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स ने लापता अमेरिकी पायलट की खोज के लिए अभियान तेज कर दिया है। ईरानी अधिकारियों ने पायलट की जानकारी देने या उसे पकड़ने वाले को इनाम देने की घोषणा की है। वहीं, ईरानी संसद के अध्यक्ष मोहम्मद बाकेर गालिबाफ ने अमेरिका पर तंज कसते हुए कहा कि अब यह युद्ध शासन परिवर्तन से हटकर अमेरिकी पायलटों की खोज तक सीमित होता जा रहा है।
इस पूरे घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए डोनाल्ड ट्रंप ने कहा, “यह युद्ध है, बातचीत पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा।” हालांकि, इन घटनाओं ने उनके उस दावे को चुनौती दी है जिसमें उन्होंने कहा था कि अमेरिकी सेना का ईरानी हवाई क्षेत्र पर पूरा नियंत्रण है।
कुल मिलाकर, इन घटनाओं ने पश्चिम एशिया में संघर्ष को और खतरनाक मोड़ पर ला खड़ा किया है, जहां हर नया दिन नई आशंकाओं और जोखिमों को जन्म दे रहा है।




