
नई दिल्ली। देश में एलपीजी संकट पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने केंद्र सरकार पर जमकर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि सरकार ने एलपीजी गैस संकट को उसी तरह संभाला है, जैसे कोविड-19 महामारी को संभाला गया था। नीति शून्य, घोषणा बड़ी और बोझ गरीबों पर।
राहुल गांधी ने एक्स पर लिखा कि मोदी ने कहा था, एलपीजी गैस संकट को कोविड की तरह हैंडल करेंगे। उन्होंने सच में वही किया है, बिल्कुल कोविड के जैसे ही नीति शून्य, घोषणा बड़ी और बोझ गरीबों पर। नेता प्रतिपक्ष ने आरोप लगाते हुए कहा कि 500-800 रुपए की दिहाड़ी कमाने वाले प्रवासी मजदूरों के लिए रसोई गैस पहुंच से बाहर हो गई है। रात को घर लौटते मजदूर के पास चूल्हे जलाने तक के पैसे नहीं। नतीजा - शहर छोड़ो, गांव भागो। राहुल गांधी ने कहा, जो मजदूर टेक्सटाइल मीलों और फैक्ट्रियों की रीढ़ हैं, आज वही टूट रहे हैं।
डेटा की सुरक्षा पर भी उठाए सवाल
राहुल गांधी ने सोमवार को भारत की डेटा संप्रभुता को लेकर चिंता जताई है। उन्होंने कहा कि भारत का डेटा उसके लोगों का है और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) अर्थव्यवस्था में यह सबसे बड़ी ताकतों में से एक हो सकता है - आई बनाने, कंपनियों को बढ़ाने और रोजगार पैदा करने के लिए। राहुल गांधी ने अपने व्हाट्सएप चैनल पर एक पोस्ट में कहा कि इसलिए मैंने सरकार से अमेरिका के साथ हालिया व्यापार सौदे के बारे में कुछ महत्वपूर्ण सवाल पूछे हैं: अमेरिका के साथ 'बाधाओं को कम करने' का हमारे डेटा के लिए क्या मतलब है? क्या हमारा स्वास्थ्य डेटा, वित्तीय डेटा और सरकारी डेटाबेस भारत में ही रहेंगे? क्या भारत अभी भी विदेशी कंपनियों को डेटा यहां संग्रहीत करने और इसका इस्तेमाल अपना खुद का एआई बनाने के लिए कर सकता है? राहुल ने कहा कि हमारी डेटा संप्रभुता, स्वास्थ्य डेटा, एआई और स्थानीय डेटा भंडारण के बारे में हर सवाल का एक ही जवाब मिलता है- 'ढांचा', 'संतुलन', 'स्वायत्तता' - बड़े शब्द, कोई विशिष्टता नहीं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार देश को यह बताने से इनकार कर रही है कि वह क्या बातचीत कर रही है।