14 दिन बाद अपहरण का अंत: जमशेदपुर के युवा उद्योगपति कैरव गांधी सुरक्षित लौटे घर

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14 दिन बाद अपहरण का अंत: जमशेदपुर के युवा उद्योगपति कैरव गांधी सुरक्षित लौटे घर
14 दिन बाद अपहरण का अंत: जमशेदपुर के युवा उद्योगपति कैरव गांधी सुरक्षित लौटे घर

14 दिन बाद अपहरण का अंत: जमशेदपुर के युवा उद्योगपति कैरव गांधी सुरक्षित लौटे घर

जमशेदपुर के लिए मंगलवार की सुबह राहत और खुशी की खबर लेकर आई। पिछले 14 दिनों से अपहरणकर्ताओं के चंगुल में फंसे 24 वर्षीय युवा उद्योगपति कैरव गांधी को पुलिस ने सुरक्षित मुक्त करा लिया है। मंगलवार तड़के करीब 4:30 बजे पुलिस की विशेष टीम उन्हें सर्किट हाउस एरिया स्थित उनके आवास पर सुरक्षित पहुंचा लाई।

कैरव की सुरक्षित वापसी के साथ ही उनके परिवार, व्यापारिक समुदाय और पूरे शहर ने राहत की सांस ली। भारी पुलिस सुरक्षा के बीच जब कैरव घर पहुंचे, तो उनके पिता देवांग गांधी और अन्य परिजनों ने भावुक होकर उन्हें गले लगा लिया।

कैसे हुआ था अपहरण

घटना की शुरुआत 13 जनवरी को हुई थी, जब कैरव गांधी सुबह अपने घर से आदित्यपुर स्थित अपनी फैक्ट्री जाने के लिए निकले थे। दोपहर तक जब वे न फैक्ट्री पहुंचे और न ही घर लौटे, तो परिजनों को चिंता हुई। उनका मोबाइल फोन भी बंद आने लगा।

उसी शाम पुलिस को उनकी कार चांडिल थाना क्षेत्र के कांदरबेड़ा, एनएच-33 के किनारे लावारिस हालत में मिली। कार की चाबी इग्निशन में थी और मोबाइल फोन पास ही जमीन पर पड़ा मिला, जिससे अपहरण की पुष्टि हो गई।

5 करोड़ की फिरौती और विदेशी नंबर

जांच में सामने आया कि अपहरणकर्ताओं ने कैरव के पिता को व्हाट्सएप कॉल कर 5 करोड़ रुपये की फिरौती मांगी थी। यह कॉल इंडोनेशिया के कोड (+62) वाले विदेशी नंबर से की गई थी, जिससे पुलिस के लिए चुनौती और बढ़ गई। अपहरणकर्ताओं ने पुलिस को सूचना देने पर गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी भी दी थी।

कई राज्यों में छापेमारी

इस हाई-प्रोफाइल केस को सुलझाने के लिए पुलिस ने पूरी ताकत झोंक दी। एसएसपी और डीजीपी के निर्देश पर 7 विशेष जांच दल गठित किए गए। जांच का दायरा झारखंड से बिहार, पश्चिम बंगाल और ओडिशा तक फैल गया।

जांच के दौरान हनी ट्रैप का एंगल भी सामने आया। सीसीटीवी फुटेज में एक सफेद स्कॉर्पियो दिखी, जिस पर ‘पुलिस का स्टीकर लगा था। इसके अलावा बिहार के वैशाली से एक संदिग्ध हैचबैक कार भी बरामद की गई, जिसका इस्तेमाल रेकी के लिए किया गया था।

राजनीतिक दबाव में झुके अपहरणकर्ता

कैरव की बरामदगी में देरी से शहर में आक्रोश बढ़ता जा रहा था। माना जा रहा है कि लगातार पुलिस दबिश और छापेमारी से घबराकर अपहरणकर्ताओं ने आखिरकार घुटने टेक दिए।

हालांकि, पुलिस ने फिलहाल यह खुलासा नहीं किया है कि गिरफ्तारी कहां से हुई या फिरौती दी गई या नहीं। फिलहाल, कैरव गांधी पूरी तरह सुरक्षित हैं, हालांकि अपहरण की वजह से वे अभी भी डरे और सहमे हुए बताए जा रहे हैं।

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