गोलू पर न भाजपा कुछ बोली और न कॉंग्रेस…आखिर क्या है इस मौन का राज?

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मध्यप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री कमलनाथ और भाजपा के भी कुछ नेताओं के खास गोलू अग्निहोत्री पर ईडी ने इतनी बड़ी कार्रवाई की, फिर भी खामोशी है. तीन दिनों से इंदौर में गोलू के घर छापा चलता रहा, लेकिन तो भाजपा की तरफ से कोई आवाज आई, ही कॉंग्रेस ने कुछ बोला. माना कि कॉंग्रेस वाले मजबूर रहे होंगे लेकिन भाजपा के मुँह पर ताला क्यों लगा रहा? हाँ, जब कार्रवाई खत्म हो गई और गोलू ईडी के चंगुल से छूटकर घर पहुच गया तो प्रदेश कॉंग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी का बयान जरूर सामने आया.

कहा तो यह जा रहा है कि गोलू के सट्टे के पैसे ने हर चुनाव में सिर चढ़कर बोला है. कॉंग्रेस नेता तो हाथ पसारने जाते ही थे, भाजपा वाले भी पीछे नहीं रहते थे. चुप्पी का एक कारण यह भी माना जा सकता है. जिस विधानसभा क्षेत्र में गोलू रहता है, वहां के एक बड़बोले भाजपा नेता की चुप्पी भी लोगों में चर्चा का विषय है.भाजपा के लोग ही कह रहे हैं कि विधानसभा चुनाव में गोलू के सट्टे के पैसे ने भी काफी कमाल दिखाया था. अब चुप रहकर ही तो अहसान चुकाया जा सकता है.

दूसरी तरफ ईडी की कार्रवाई में जिस तरह से गोलू से जुड़े लोगो के नाम सामने आए हैं, उससे भी भाजपाकॉंग्रेस के अधिकांश नेता सहमे हुए थे. अब चूँकि गोलू के साथ कइयों ने धंधा कर रखा है, धंधा सही लेनदेन तो किया ही है. ऐसे में अगर कुछ बोल देते और गोलू के मुँह से कुछ निकल जाता तो मिट्टी पलीद हो जाती.

हर बिजनेसमैन लेनदेन का हिसाब कच्चापक्का तो रखता ही है. ऐसे में किसी पर्ची पर लिखा ही कुछ मिल जाता तो मुसीबत गले पड़ सकती थी. इसलिए दोनों दलों के अधिकांश नेता मुँह पर पट्टी बांधे रहे. अब गोलू ने ईडी के सामने क्या उगला यह तो बाद में सामने आएगा, लेकिन कइयों की साँस अभी भी अटकी हुई है.

चलिए एक बार इन चर्चाओं को झूठा मान भी लेते हैं तो फिर इस चुप्पी का आखिर क्या कारण माना जाए? क्या कारण है कि भाजपा के एक नेता ने भी कोई टिप्पणी नहीं की? क्या पार्टी या सरकार ने मना कर रखा था? यह चुप्पी बताती है कि भले ही पूरी दाल काली हो लेकिन कुछ काला तो जरूर है

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