अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) पर 18 दिन बिताने के बाद भारतीय वायुसेना के ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला आज धरती पर लौट रहे हैं

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अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) पर 18 दिन बिताने के बाद भारतीय वायुसेना के ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला आज धरती पर लौट रहे हैं
अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) पर 18 दिन बिताने के बाद भारतीय वायुसेना के ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला आज धरती पर लौट रहे हैं

ऐतिहासिक अंतरिक्ष मिशन पूरा कर शुभांशु शुक्ला की धरती पर वापसी आज

अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) पर 18 दिन बिताने के बाद भारतीय वायुसेना के ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला आज धरती पर लौट रहे हैं। उन्होंने एक्सिओम-4 मिशन के तहत यह ऐतिहासिक यात्रा की, जिसमें उन्होंने न केवल कई वैज्ञानिक प्रयोग किए, बल्कि अंतरिक्ष से पृथ्वी की 288 बार परिक्रमा भी की।

भारतीय वायुसेना के ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला कक्षीय प्रयोगशाला में एक  ब्रेन-कंप्यूटर इंटरफ़ेस विकसित करने के काम में जुटे हैं -

शुभांशु और उनके तीन साथी—मिशन कमांडर पैगी व्हिटसन (अमेरिका), मिशन विशेषज्ञ स्लावोज उज्नान्स्की-विस्नीव्स्की (पोलैंड) और टिबोर कापू (हंगरी)—सोमवार शाम 4:45 बजे (भारतीय समयानुसार) 10 मिनट की देरी से आईएसएस से रवाना हुए। करीब 22.5 घंटे की अंतरिक्ष यात्रा के बाद यह दल आज मंगलवार दोपहर 3 बजे (भारतीय समयानुसार) अमेरिका के कैलिफोर्निया के समुद्र तट पर लैंड करेगा।

नासा ने शुभांशु और उनके साथियों की रवानगी का लाइव प्रसारण किया। प्रस्थान से पहले उन्होंने आईएसएस पर मौजूद अन्य अंतरिक्ष यात्रियों से गले मिलकर और हाथ मिलाकर विदाई ली। रविवार को अपने विदाई भाषण में शुभांशु ने कहा था, “जल्द ही धरती पर मुलाकात करते हैं।”

26 जून को आईएसएस पहुंचे शुभांशु शुक्ला अंतरिक्ष की यात्रा करने वाले दूसरे भारतीय बने हैं। उनसे पहले 1984 में राकेश शर्मा ने अंतरिक्ष में जाकर इतिहास रचा था।

अंतरिक्ष यात्रा के बाद शुभांशु और उनकी टीम को सात दिनों तक पुनर्वास (रिहैबिलिटेशन) प्रक्रिया से गुजरना होगा ताकि उनका शरीर फिर से पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण में ढल सके। यह प्रक्रिया वैज्ञानिकों की निगरानी में की जाएगी, क्योंकि अंतरिक्ष में वजनहीन वातावरण में लंबे समय तक रहने से शरीर पर विशेष प्रभाव पड़ता है।

शुभांशु की यह यात्रा न केवल भारत के अंतरिक्ष इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ती है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन गई है।

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