वास्तविक नियंत्रण रेखा पर भारत-चीन के बीच सहमति: देपसांग और डेमचोक से सैनिकों की वापसी, गश्त और चराई फिर शुरू

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वास्तविक नियंत्रण रेखा पर भारत-चीन के बीच सहमति: देपसांग और डेमचोक से सैनिकों की वापसी, गश्त और चराई फिर शुरू
वास्तविक नियंत्रण रेखा पर भारत-चीन के बीच सहमति: देपसांग और डेमचोक से सैनिकों की वापसी, गश्त और चराई फिर शुरू

वास्तविक नियंत्रण रेखा पर भारत-चीन के बीच सहमति: देपसांग और डेमचोक से सैनिकों की वापसी, गश्त और चराई फिर शुरू

भारत और चीन के बीच लंबे समय से जारी सीमा विवाद के संदर्भ में अब वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर स्थिति सामान्य होती नजर आ रही है। देपसांग और डेमचोक क्षेत्रों में गश्त और अन्य गतिविधियों को लेकर 21 अक्टूबर 2024 को दोनों देशों के बीच महत्वपूर्ण सहमति बनी है। यह जानकारी लोकसभा में विदेश मंत्रालय द्वारा दी गई।

यूसुफ पठान ने उठाए सवाल

लोकसभा सांसद और पूर्व क्रिकेटर यूसुफ पठान ने सदन में विदेश मंत्रालय से तीन अहम सवाल पूछे:

  1. क्या भारत सरकार के पास वास्तविक नियंत्रण रेखा पर गश्त की व्यवस्था से जुड़ा कोई हालिया समझौता है?

  2. यदि हां, तो उसका विस्तृत ब्यौरा क्या है?

  3. सैनिकों को पीछे हटाने और भविष्य में संघर्ष रोकने के लिए क्या उपाय किए जा रहे हैं?


सरकार का जवाब: समझौता और कार्रवाई

विदेश राज्य मंत्री कीर्तिवर्धन सिंह ने इन सवालों के जवाब में बताया कि:

  • भारत और चीन ने 21 अक्टूबर 2024 को देपसांग और डेमचोक में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर गश्त व्यवस्था को लेकर सहमति व्यक्त की थी।

  • इस समझौते के तहत, अप्रैल-मई 2020 से टकराव के सभी बिंदुओं से दोनों देशों की सेनाएं वापस बुला ली गई हैं।

  • यह भी तय हुआ है कि जहां संभव हो, पूर्व की परंपरा के अनुसार पशुओं की चराई की अनुमति फिर से दी जाएगी।

सीमा पर शांति बहाली की दिशा में लगातार वार्ता

विदेश राज्य मंत्री के अनुसार, यह समझौता सहमत तरीकों और समय-सीमा के तहत प्रभावी रूप से लागू किया गया है। इसके बाद से कई दौर की बैठकें हो चुकी हैं:

  • दिसंबर 2024 में विशेष प्रतिनिधियों की 23वीं बैठक हुई।

  • मार्च 2025 में भारत-चीन सीमा मामलों पर परामर्श और समन्वय कार्य तंत्र (WMCC) की 33वीं बैठक आयोजित की गई।

इन बैठकों का उद्देश्य सीमा पर प्रभावी प्रबंधन, संवेदनशीलता में कमी, और अमन-शांति बनाए रखना है।

यह घटनाक्रम भारत और चीन के बीच सैन्य तनाव को घटाने और सामान्य स्थिति बहाल करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। अब यह देखना होगा कि यह समझौता जमीनी स्तर पर कितनी मजबूती से कायम रहता है और क्या दोनों देशों के बीच विश्वास बहाली आगे भी जारी रहती है।

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