नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को अपने रेडियो कार्यक्रम मन की बात में एक बार फिर वोकल फॉर लोकल की बात कही। पीएम मोदी ने कहा कि नवंबर का महीना बहुत सी प्रेरणाएं लेकर आया, कुछ दिन पहले ही 26 नवंबर को ‘संविधान दिवस‘ पर सेंट्रल हॉल में विशेष कार्यक्रम का आयोजन हुआ। वंदेमातरम् के 150 वर्ष होने पर पूरे देश में होने वाले कार्यक्रमों की शानदार शुरुआत हुई। 25 नवंबर को अयोध्या में राम मंदिर पर धर्मध्वजा का आरोहण हुआ। इसी दिन कुरुक्षेत्र के ज्योतिसर में पांचजन्य स्मारक का लोकार्पण हुआ।
पीएम मोदी ने हरियाणा के कुरुक्षेत्र का जिक्र करते हुए बताया कि कैसे डिजिटल तकनीक के द्वारा थ्रीडी, लाइट एंड साउंड शो और डिजिटल तकनीक को दिखाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि हरियाणा के कुरुक्षेत्र में महाभारत का युद्ध हुआ था, ये हम सभी जानते हैं, लेकिन युद्ध के इस अनुभव को आप वहां महाभारत अनुभव केंद्र में भी साक्षात महसूस कर सकते हैं। पीएम मोदी ने कहा कि कुरुक्षेत्र में ब्रह्म सरोवर पर आयोजित अंतर्राष्ट्रीय गीता महोत्सव में शामिल होना भी मेरे लिए बहुत विशेष रहा। मैं ये देखकर बहुत प्रभावित हुआ कि कैसे दुनियाभर के लोग दिव्य ग्रंथ गीता से प्रेरित हो रहे हैं। इस महोत्सव में यूरोप और सेंट्रल एशिया सहित विश्व के कई देशों के लोगों की भागीदारी रही है। उन्होंने कहा कि इस महीने की शुरुआत में सऊदी अरब में पहली बार किसी सार्वजनिक मंच पर गीता की प्रस्तुति की गई है। यूरोप के लातविया में भी एक यादगार गीता महोत्सव आयोजित किया गया। इस महोत्सव में लातविया, एस्टोनिया, लिथुआनिया और अल्जीरिया के कलाकारों ने बढ़–चढ़कर हिस्सा लिया।
भारत में शांति और करुणा का भाव सर्वोपरि
पीएम मोदी ने कहा कि भारत की महान संस्कृति में शांति और करुणा का भाव सर्वोपरि रहा है। आप दूसरे विश्व युद्ध की कल्पना कीजिए, जब चारों ओर विनाश का भयावह माहौल बना हुआ था। ऐसे मुश्किल समय में गुजरात के नवानगर के जाम साहब, महाराजा दिग्विजय सिंह जी ने जो महान कार्य किया, वो आज भी हमें प्रेरणा देता है।
वोकल फॉर लोकल के मंत्र को साथ लेकर चलें
प्रधानमंत्री ने कहा कि मैं आप सभी से हमेशा वोकल फॉर लोकल के मंत्र को साथ लेकर चलने की बात करता हूं। अभी कुछ दिनों पहले G-20 शिखर सम्मेलन के दौरान जब विश्व के कई नेताओं को उपहार देने की बात आई, तो मैंने फिर वोकल फॉर लोकल कहा। मैंने देशवासियों की ओर से विश्व के नेताओं को जो उपहार भेंट किए, उसमें इस भावना का विशेष ध्यान रखा गया।


