भारत में वर्कवीक पर बहस: कितने घंटे काम करना सही? विशेषज्ञों और उद्योगपतियों की राय अलग

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भारत में वर्कवीक पर बहस: कितने घंटे काम करना सही? विशेषज्ञों और उद्योगपतियों की राय अलग
भारत में वर्कवीक पर बहस: कितने घंटे काम करना सही? विशेषज्ञों और उद्योगपतियों की राय अलग

भारत में वर्कवीक पर बहस: कितने घंटे काम करना सही? विशेषज्ञों और उद्योगपतियों की राय अलग

देश में सप्ताह में कितने घंटे काम किया जाना चाहिए—इस पर लंबे समय से बहस चल रही है। इस चर्चा में अब WHO की पूर्व मुख्य वैज्ञानिक और स्वास्थ्य मंत्रालय की सलाहकार डॉ. सौम्या स्वामीनाथन का नाम भी जुड़ गया है। उन्होंने लगातार अधिक घंटे काम करने के खतरे को उजागर किया और आराम तथा मानसिक स्वास्थ्य की अहमियत पर जोर दिया।

“ज्यादा काम, कम उत्पादकता” – डॉ. सौम्या स्वामीनाथन

– हर व्यक्ति की सहनशक्ति अलग होती है, लेकिन शरीर संकेत देता है कि कब उसे आराम की जरूरत है।
– कोविड-19 महामारी के दौरान लंबे समय तक बिना आराम के काम करने से स्वास्थ्यकर्मी बर्नआउट का शिकार हुए।
– “आप कुछ महीनों तक ज्यादा मेहनत कर सकते हैं, लेकिन यह लंबे समय तक संभव नहीं है,” उन्होंने कहा।
– नींद और मानसिक ब्रेक ज़रूरी हैं ताकि कार्य क्षमता बनी रहे।
– उन्होंने स्पष्ट किया कि काम की गुणवत्ता ज्यादा मायने रखती है, न कि सिर्फ लंबे घंटे काम करना।

70-90 घंटे काम करने की वकालत क्यों?

हाल ही में कुछ उद्योगपतियों और अर्थशास्त्रियों ने लंबे वर्कवीक की वकालत की।
– L&T चेयरमैन एस. एन. सुब्रह्मण्यन ने कहा कि कर्मचारियों को हफ्ते में 90 घंटे काम करना चाहिए।
– इन्फोसिस के को-फाउंडर नारायण मूर्ति ने 70 घंटे की वर्कवीक का सुझाव दिया था।
– नीति आयोग के पूर्व CEO अमिताभ कांत ने कहा कि भारत को 30 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने के लिए 80-90 घंटे की वर्कवीक अपनानी होगी।

सरकार का रुख: फिलहाल कोई बदलाव नहीं

हालांकि, केंद्र सरकार ने साफ कर दिया है कि वह काम के घंटे बढ़ाने का कोई प्रस्ताव नहीं ला रही है।
– संसद में श्रम और रोजगार राज्य मंत्री शोभा करंदलाजे ने कहा कि 70-90 घंटे की वर्कवीक पर विचार नहीं किया जा रहा।

क्या होना चाहिए संतुलन?

इस बहस में एक तरफ वे लोग हैं जो मानते हैं कि भारत को आर्थिक महाशक्ति बनने के लिए ज्यादा मेहनत करनी होगी, जबकि दूसरी तरफ विशेषज्ञ मानते हैं कि अत्यधिक काम से उत्पादकता कम होती है और स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ता है। सवाल यह है कि क्या लंबी वर्कवीक आर्थिक विकास को तेज कर सकती है या यह कर्मचारियों की कार्यक्षमता और संतुलित जीवन के लिए खतरा बनेगी?

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