त्रिनिदाद और टोबैगो की संसद में बोले पीएम मोदी;हमारे संबंधों की नींव सदियों पुराने बंधनों पर टिकी 

Date:


AI Audio Companion
Ready to stream full article

👉 यह भी पढ़ें:

0:00

0:00 left

त्रिनिदाद और टोबैगो की संसद में बोले पीएम मोदी;हमारे संबंधों की नींव सदियों पुराने बंधनों पर टिकी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने त्रिनिदाद और टोबैगो के ऐतिहासिक दौरे के दौरान वहां की संसद को संबोधित किया। अपने भाषण में उन्होंने भारत और त्रिनिदाद-टोबैगो के ऐतिहासिक और सांस्कृतिक संबंधों को रेखांकित किया।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पांच देशों की यात्रा के दूसरे चरण में आज  पहुंचेंगे त्रिनिदाद और टोबैगो -

पीएम मोदी ने कहा, “भारतीयों के लिए लोकतंत्र सिर्फ़ एक राजनीतिक व्यवस्था नहीं, बल्कि जीवन जीने का तरीका है। यह हमारी हज़ारों वर्षों की महान विरासत का हिस्सा है।”

उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि त्रिनिदाद और टोबैगो की संसद में कई सदस्य ऐसे हैं जिनके पूर्वज भारत, विशेषकर बिहार से हैं — वही बिहार जो प्राचीन गणराज्य प्रणाली, यानी महाजनपदों की भूमि रहा है।

भारत और त्रिनिदाद-टोबैगो के रिश्तों की गर्मजोशी पर बोलते हुए उन्होंने कहा, “हमारे बीच संबंधों की नींव सदियों पुराने बंधनों पर टिकी है। करीब 180 साल पहले भारतीय पहली बार कठिन यात्रा कर इस धरती पर पहुंचे थे।”

क्रिकेट के प्रति साझा जुनून का ज़िक्र करते हुए पीएम मोदी ने मुस्कराते हुए कहा, “भारतीय, वेस्टइंडीज़ क्रिकेट टीम के सबसे बड़े प्रशंसकों में शामिल हैं — बस तब नहीं, जब वे भारत के ख़िलाफ़ खेलते हैं।”

Abhilash Shukla (Editor)
Abhilash Shukla (Editor)http://www.hbtvnews.com
Abhilash Shukla is an experienced editor with over 28 years in journalism. He is known for delivering balanced, impactful, and credible news coverage.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Share post:

Subscribe

spot_imgspot_img

Popular

Recent News
Related

Hormuz Strait Attack: होर्मुज में तेल टैंकर पर मिसाइल हमले में  भारतीय नाविक की मौत, भारत ने ईरानी राजनयिकों को किया तलब

होर्मुज जलडमरूमध्य (Hormuz Strait) के पास संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के दो तेल टैंकरों पर हुए मिसाइल हमले में एक भारतीय नाविक की मौत हो गई, जबकि छह भारतीयों समेत कुल आठ चालक दल के सदस्य घायल हो गए। इस घटना के बाद भारत सरकार ने सख्त रुख अपनाते हुए ईरान के वरिष्ठ राजनयिकों को तलब किया और औपचारिक विरोध दर्ज कराया।