असदुद्दीन ओवैसी ने भाजपा विधायक रामेश्वर शर्मा को स्टेज से खुली चुनौती दी, जिससे राजनीतिक गलियारे में हलचल मच गई। इस चुनौती के दौरान ओवैसी ने काजी कैंप को लेकर गंभीर आरोप और ऐतिहासिक संदर्भ भी प्रस्तुत किए।
ओवैसी ने रामेश्वर शर्मा को काजी कैंप पर मिसाइल गिराने की चुनौती दी
मध्य प्रदेश में असदुद्दीन ओवैसी ने भाजपा के विधायक रामेश्वर शर्मा के काजी कैंप पर मिसाइल गिराने वाले विवादित बयान पर तीखा पलटवार किया। ओवैसी ने कहा कि अगर रामेश्वर शर्मा माई के लाल हैं तो वे काजी कैंप पर जाकर मिसाइल लॉन्च करें। उन्होंने अपने बयान में कहा, “मैं अकेला काजी कैंप पर ठहरता हूं, तुम्हारे जैसे लोगों से मैं डरने वाला नहीं हूं।” यह बयान भोपाल की जनसभा में दिया गया, जहां ओवैसी ने भाजपा विधायक पर जमकर हमला बोला।
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काजी कैंप का ऐतिहासिक संदर्भ और ओवैसी की बात
ओवैसी ने काजी कैंप के इतिहास का हवाला देते हुए कहा कि यह जगह आजादी की लड़ाई में कई सेनानियों का गढ़ रही है। उन्होंने काजी सैयद आबेद अली, वाजिद अली हुसैनी और अन्य स्वतंत्रता सेनानियों के नामों का उल्लेख किया। ओवैसी का यह बयान भाजपा विधायक के बयान के जवाब में आया, जिसमें उन्होंने काजी कैंप को निशाना बनाया था।
रामेश्वर शर्मा के बयान और उनकी सफाई
रामेश्वर शर्मा ने एक कार्यक्रम में कहा था कि करोंद से काजी कैंप पर मिसाइल गिरानी चाहिए। हालांकि बाद में उन्होंने सफाई दी कि उनका तात्पर्य भोपाल के काजी कैंप से नहीं, बल्कि इस्लामाबाद के काजी कैंप से था। लेकिन इस बयान ने राजनीतिक विवाद को हवा दी। शर्मा ने अपने बयान पर कायम रहने की बात कही और आतंकवाद के खिलाफ मिसाइल हमलों को उचित बताया।
ओवैसी ने समान नागरिक संहिता को लेकर सरकार पर लगाया गंभीर आरोप
जनसभा से पहले आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में ओवैसी ने केंद्र और राज्य सरकारों पर समान नागरिक संहिता (यूसीसी) के बहाने अल्पसंख्यकों के अधिकार छीनने का आरोप लगाया। उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 14, 25, 26 और 29 का जिक्र करते हुए कहा कि ये धाराएं सभी नागरिकों को समानता और धार्मिक स्वतंत्रता प्रदान करती हैं। ओवैसी ने दावा किया कि कई भाजपा शासित राज्यों में मस्जिदों और कब्रिस्तान को नुकसान पहुंचाया जा रहा है।
राजनीतिक प्रतिक्रिया और आम जनता पर असर
ओवैसी और रामेश्वर शर्मा के बीच यह विवाद राजनीतिक माहौल को गर्मा रहा है। ऐसे बयान आम जनता के बीच तनाव बढ़ाने का खतरा रखते हैं। इस विवाद से खासकर भोपाल के मुस्लिम समुदाय और स्थानीय लोगों में चिंता व्याप्त है। राजनीतिक दलों के बीच यह टकराव आगामी चुनावी रणनीतियों को भी प्रभावित कर सकता है।
आगे की संभावनाएं और राजनीतिक माहौल
आगामी दिनों में इस विवाद के और बढ़ने की संभावना है। भाजपा और AIMIM के बीच सियासी टकराव तेज हो सकता है। ओवैसी की चुनौती के जवाब में भाजपा की प्रतिक्रिया भी महत्वपूर्ण रहेगी। इस संघर्ष से मध्य प्रदेश का राजनीतिक परिदृश्य और अधिक प्रतिस्पर्धात्मक बन सकता है।



