उस्मान हादी की हत्या के बाद बांग्लादेश में उबाल, ढाका में हिंसा और मीडिया दफ्तरों पर हमले

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उस्मान हादी की हत्या के बाद बांग्लादेश में उबाल, ढाका में हिंसा और मीडिया दफ्तरों पर हमले
उस्मान हादी की हत्या के बाद बांग्लादेश में उबाल, ढाका में हिंसा और मीडिया दफ्तरों पर हमले

उस्मान हादी की हत्या के बाद बांग्लादेश में उबाल, ढाका में हिंसा और मीडिया दफ्तरों पर हमले

बांग्लादेश में युवा नेता उस्मान हादी की मौत के बाद राजधानी ढाका में हालात बेहद तनावपूर्ण हो गए हैं। सड़कों पर उतरे गुस्साए युवाओं ने अखबारों और राजनीतिक दलों से जुड़ी इमारतों को निशाना बनाया। कई इलाकों में हिंसा और आगजनी की घटनाओं के बाद स्थिति चिंताजनक बनी हुई है।

कौन है उस्मान हादी? जिसको गोली मारते ही बांग्लादेश में फैली अशांति

उस्मान हादी की हत्या के विरोध में इंकिलाब मंच के समर्थकों के साथ ढाका यूनिवर्सिटी सेंट्रल स्टूडेंट्स यूनियन और अन्य छात्र संगठनों ने शाहबाग में धरना-प्रदर्शन किया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, प्रदर्शनकारी राजू मेमोरियल मूर्ति के पास जमा हुए और हादी के हत्यारों को कड़ी सजा देने की मांग को लेकर नारेबाजी की। एहतियातन सड़कों के दोनों ओर बैरिकेड लगाए गए, हालांकि शाहबाग और आसपास के इलाकों में यातायात सामान्य बना रहा। हालात को काबू में रखने के लिए भारी पुलिस बल तैनात किया गया और सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह अलर्ट रहीं।

तनाव उस वक्त और बढ़ गया, जब उग्र भीड़ ने ढाका के करवान बाजार स्थित डेली स्टार अखबार के दफ्तर पर हमला कर दिया। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, दफ्तर में फंसे कम से कम 25 पत्रकारों को करीब चार घंटे बाद सुरक्षित बाहर निकाला गया। इससे पहले प्रदर्शनकारियों ने प्रथम आलो अखबार के कार्यालय पर भी धावा बोला, जहां तोड़फोड़ के बाद आगजनी की गई और नारे लगाए गए। बताया जा रहा है कि प्रदर्शनकारी इन दोनों प्रमुख अखबारों को भारत समर्थक मान रहे थे।

हादी की मौत की खबर फैलते ही ढाका यूनिवर्सिटी और शाहबाग चौराहे पर सैकड़ों छात्र और आम लोग सड़कों पर उतर आए। ‘तुम कौन, हम कौन—हादी, हादी’ जैसे नारों से राजधानी गूंज उठी। कई जगहों पर हालात बेहद तनावपूर्ण हो गए और मीडिया संस्थानों पर हमलों की खबरें सामने आईं।

इस बीच मुख्य सलाहकार मुहम्मद यूनुस ने उस्मान हादी को पराजित ताकतों और फासीवादी शक्तियों का दुश्मन बताते हुए कहा कि डर और हिंसा के ज़रिए लोकतांत्रिक प्रगति को रोका नहीं जा सकता। उन्होंने शनिवार को एक दिवसीय राजकीय शोक की घोषणा भी की।

राजधानी के बाहर भी विरोध प्रदर्शन देखने को मिले। प्रदर्शनकारियों ने भारत के सहायक उच्चायोग की ओर बढ़ने की कोशिश की, लेकिन दंगा नियंत्रण में तैनात पुलिस ने बैरिकेड लगाकर उन्हें रोक दिया। इस दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच हल्की झड़प भी हुई। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में भारत विरोधी नारे लगाए जाते देखे गए।

खुलना में ‘यूनिटी अगेंस्ट इंडियन हेजेमनी’ के बैनर तले प्रदर्शन हुआ, जहां पुलिस के साथ सेना और नौसेना के जवानों ने मिलकर प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोका। कड़ी निगरानी के चलते प्रदर्शनकारी मिशन तक नहीं पहुंच सके और शांतिपूर्ण रैली के बाद वापस लौट गए।

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