रियल एस्टेट कंसल्टेंट नाइट फ्रैंक की ताजा रिपोर्ट ने भारत की संपत्ति वृद्धि को लेकर बड़ा संकेत दिया है। ‘द वेल्थ रिपोर्ट 2026’ के अनुसार, देश में अगले पांच वर्षों में अरबपतियों की संख्या में जबरदस्त बढ़ोतरी देखने को मिलेगी। अनुमान है कि 2031 तक भारत में अरबपतियों की संख्या 51 प्रतिशत बढ़कर 313 तक पहुंच जाएगी।
रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि अति-धनाढ्य व्यक्तियों यानी यूएचएनडब्ल्यूआई की संख्या भी तेजी से बढ़ रही है। ऐसे लोग, जिनकी कुल संपत्ति 3 करोड़ डॉलर या उससे अधिक होती है, उनकी संख्या भारत में बढ़कर 25,217 तक पहुंचने का अनुमान है। फिलहाल देश में ऐसे 19,877 लोग और कुल 207 अरबपति मौजूद हैं।
👉 यह भी पढ़ें:
- झारखंड में इंडिया गठबंधन का घोषणा पत्र जारी, भाजपा की तर्ज पर महिलाओं को देंगे हर महीने 2500 रुपए, 450 में गैस सिलेंडर
- मुर्शिदाबाद हिंसा पर बांग्लादेश ने खोली जुबान तो भारत के विदेश मंत्रालय ने कहा-पहले खुद का घर देखें
- बांग्लादेश में हिंदू नेता की हत्या पर भारत की कड़ी प्रतिक्रिया
- पहलगाम आतंकी हमले के बाद पीएम मोदी ने सऊदी अरब दौरा बीच में छोड़ा, लौटे भारत
रिपोर्ट के मुताबिक, वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं, बढ़ती ब्याज दरों और असमान आर्थिक प्रदर्शन के बावजूद संपत्ति में वृद्धि जारी है। खासतौर पर भारत में तकनीक, उद्योग और पूंजी बाजार के तेज विस्तार ने इस वृद्धि को नई गति दी है।
भारत में अमीर वर्ग का बड़ा हिस्सा मुंबई में केंद्रित है, जहां यूएचएनडब्ल्यूआई आबादी का लगभग 35.4 प्रतिशत निवास करता है। वैश्विक स्तर पर भारत इस श्रेणी में छठे स्थान पर है, जबकि अरबपतियों की संख्या के मामले में अमेरिका और चीन के बाद तीसरे स्थान पर पहुंच चुका है।
रिपोर्ट के अनुसार, पिछले पांच वर्षों में भारत में अरबपतियों की संख्या में 58 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है, जो देश की मजबूत आर्थिक प्रगति को दर्शाती है।
भारत में संपन्न वर्ग का विस्तार तेजी से बढ़ती उद्यमिता और मजबूत होते वित्तीय बाजारों का परिणाम है। डिजिटलाइजेशन, शेयर बाजार में बढ़ती भागीदारी, निजी पूंजी निवेश और पारिवारिक व्यवसायों की मजबूती इस उछाल के प्रमुख कारण हैं।
यह रिपोर्ट स्पष्ट करती है कि भारत वैश्विक संपत्ति परिदृश्य में तेजी से अपनी पकड़ मजबूत कर रहा है और आने वाले वर्षों में इसकी आर्थिक ताकत और प्रभाव और बढ़ने की संभावना है।


