जज यशवंत वर्मा के घर में आग और अधजले नोटों की बरामदगी पर विवाद गहराया, सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर

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जज यशवंत वर्मा के घर में आग और अधजले नोटों की बरामदगी पर विवाद गहराया, सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर

दिल्ली में हाई कोर्ट के जज यशवंत वर्मा के सरकारी आवास पर आग लगने और अधजले नोटों की बरामदगी के मामले में विवाद लगातार बढ़ता जा रहा है। इस घटना को लेकर सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दायर की गई है, जिसमें दिल्ली पुलिस को एफआईआर दर्ज करने का निर्देश देने और जजों को विशेष छूट देने वाले 1991 के फैसले को चुनौती देने की मांग की गई है।

क्या है मामला?

14 मार्च 2025 की रात करीब 11:35 बजे जज यशवंत वर्मा के लुटियंस दिल्ली स्थित सरकारी आवास पर आग लगने की घटना हुई। आग बुझाने के बाद अधजले नोटों का बड़ा ढेर बरामद हुआ, जिससे मामले ने तूल पकड़ लिया। इसके बाद सीजेआई संजीव खन्ना की अध्यक्षता वाली सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम और दिल्ली हाई कोर्ट ने न्यायमूर्ति वर्मा को न्यायिक कार्यों से हटा दिया। सीजेआई ने जांच के लिए एक आंतरिक समिति का गठन किया और दिल्ली हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश डी. के. उपाध्याय को न्यायमूर्ति वर्मा को कोई न्यायिक कार्य न सौंपने का निर्देश दिया।

याचिका में क्या कहा गया है?

  • एफआईआर दर्ज करने की मांग:
    याचिकाकर्ताओं ने दिल्ली पुलिस को तत्काल एफआईआर दर्ज करने और निष्पक्ष जांच करने का निर्देश देने की मांग की है।

  • 1991 के फैसले को चुनौती:
    याचिका में के. वीरस्वामी मामले में दिए गए फैसले को चुनौती दी गई है, जिसमें कहा गया था कि भारत के मुख्य न्यायाधीश की पूर्व अनुमति के बिना हाई कोर्ट या सुप्रीम कोर्ट के किसी जज के खिलाफ कोई आपराधिक कार्यवाही शुरू नहीं की जा सकती।

  • कानून के समक्ष समानता का मुद्दा:
    याचिकाकर्ताओं ने दलील दी कि न्यायाधीशों को विशेष छूट देना संविधान के समानता के सिद्धांत का उल्लंघन है। उन्होंने तर्क दिया कि यह छूट न्यायिक जवाबदेही और कानून के शासन को प्रभावित करती है।

  • कॉलेजियम समिति पर सवाल:
    याचिका में यह भी कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट की तीन सदस्यीय समिति को इस मामले की जांच करने का कोई अधिकार नहीं है, क्योंकि यह संवैधानिक या कानूनी प्रावधानों पर आधारित नहीं है।

मुख्य मांगें

  1. एफआईआर दर्ज करने का निर्देश:
    दिल्ली पुलिस को न्यायमूर्ति वर्मा के आवास पर अधजले नोटों की बरामदगी के मामले में तत्काल एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया जाए।

  2. 1991 के फैसले की समीक्षा:
    न्यायाधीशों को दिए गए विशेषाधिकार को खत्म करने और के. वीरस्वामी मामले में दिए गए फैसले की समीक्षा की जाए।

  3. न्यायिक जवाबदेही:
    केंद्र सरकार को न्यायिक मानक और जवाबदेही विधेयक, 2010 को फिर से लागू करने की सिफारिश की जाए।

इस विवाद ने न्यायपालिका में पारदर्शिता और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सुप्रीम कोर्ट इस याचिका पर क्या रुख अपनाता है, इस पर देश की निगाहें टिकी हुई हैं।

Abhilash Shukla (Editor)
Abhilash Shukla (Editor)http://www.hbtvnews.com
Abhilash Shukla is an experienced editor with over 28 years in journalism. He is known for delivering balanced, impactful, and credible news coverage.

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