जनसंख्या नियंत्रण का असर: भारत की जन्म दर 1.9 पर पहुंची, जनसांख्यिकीय बदलाव के संकेत

0
0
जनसंख्या नियंत्रण का असर: भारत की जन्म दर 1.9 पर पहुंची, जनसांख्यिकीय बदलाव के संकेत
जनसंख्या नियंत्रण का असर: भारत की जन्म दर 1.9 पर पहुंची, जनसांख्यिकीय बदलाव के संकेत

जनसंख्या नियंत्रण का असर: भारत की जन्म दर 1.9 पर पहुंची, जनसांख्यिकीय बदलाव के संकेत

संयुक्त राष्ट्र की नवीनतम जनसांख्यिकी रिपोर्ट के अनुसार, भारत की कुल प्रजनन दर (Fertility Rate) अब 1.9 पर आ गई है। इसका अर्थ है कि औसतन एक महिला अब दो से भी कम बच्चों को जन्म दे रही है।

भारत अब भी दुनिया की सबसे बड़ी आबादी वाला देश बनने की राह पर

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि 2025 के अंत तक भारत की कुल आबादी 1.46 अरब तक पहुंच जाएगी, जिससे यह दुनिया का सबसे अधिक जनसंख्या वाला देश बना रहेगा।

जनसंख्या नियंत्रण पर कानून बनाने की मांग खारिज, SC ने कहा- ये सरकार का काम  | Supreme court rejects plea demands population control

प्रतिस्थापन दर से नीचे, भविष्य में आबादी में गिरावट की आशंका

जनसंख्या को स्थिर बनाए रखने के लिए आवश्यक प्रतिस्थापन दर 2.1 मानी जाती है इससे कम दर का मतलब है कि आने वाले वर्षों में युवाओं की संख्या घट सकती है।
रिपोर्ट के अनुसार, भारत की वर्तमान प्रजनन दर 1.9 इस ओर संकेत करती है कि जनसंख्या धीरे-धीरे घटने की ओर बढ़ रही है, हालांकि इसमें 50 से 60 साल का समय लग सकता है।

भारत की युवा आबादी अब भी मजबूत, पर गिरावट का जोखिम

वर्तमान में भारत की जनसंख्या में:

  • 0-14 आयु वर्ग: 24%
  • 10-19 आयु वर्ग: 17%
  • 10-24 आयु वर्ग: 26%
  • कामकाजी आयु (15-64 वर्ष): 68%

यह संरचना देश को एक जनसांख्यिकीय लाभांश देती है, बशर्ते कि रोजगार और नीति समर्थन पर्याप्त हों।

बुजुर्ग आबादी में वृद्धि की संभावना

भारत में वर्तमान में 65 वर्ष या उससे अधिक आयु के लोग 7% हैं। रिपोर्ट के अनुसार, जीवन प्रत्याशा में सुधार के साथ यह प्रतिशत बढ़ेगा।
2025 तक अनुमानित जीवन प्रत्याशा:

  • पुरुष: 71 वर्ष
  • महिलाएं: 74 वर्ष

प्रजनन दर में गिरावट के पीछे आर्थिक और सामाजिक कारण

रिपोर्ट में प्रजनन दर गिरने के कई कारण सामने आए:

  • 38% लोगों ने कहा कि वित्तीय सीमाएं उन्हें परिवार बढ़ाने से रोकती हैं
  • 22% को आवास की कमी
  • 21% को नौकरी की असुरक्षा
  • 18% को विश्वसनीय चाइल्डकेयर की कमी
  • 15% को स्वास्थ्य समस्याएं
  • 14% को गर्भावस्था से संबंधित देखभाल की सीमित पहुंच
  • 13% को बांझपन

इन सभी कारणों से लोगों में पैरेंटहुड को लेकर तनाव बढ़ा है और परिवार बढ़ाने की इच्छा कम हुई है।

यह रिपोर्ट भारत में एक बदलते जनसांख्यिकीय परिदृश्य की ओर इशारा करती है, जहां वर्तमान की युवा ताकत के बावजूद भविष्य में प्रजनन दर में गिरावट और बुजुर्गों की बढ़ती आबादी सामाजिक-आर्थिक चुनौतियों को जन्म दे सकती है।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here