कर्मचारी गृह निर्माण संस्था की वरीयता सूची फिर उलझी, सुशीला चौरसिया की याचिका पर हाईकोर्ट ने लगाई रोक

Date:

इंदौर। कर्मचारी गृह निर्माण संस्था की वरीयता सूची का विवाद अब हाईकोर्ट पहुंच गया है। हाईकोर्ट ने संस्था की सदस्य सुशीला चौरसिया की याचिका पर सुनवाई करते हुए फिलहाल वरीयता सूची के आधार पर प्लॉट का आवंटन रोक दिया है। हाईकोर्ट ने सहकारिता विभाग, इंदौर विकास प्राधिकरण तथा अन्य संबंधित पक्षों को नोटिस भेजकर जवाब मांगा है।

उल्लेखनीय है कि सुशीला चौरसिया ने अपनी याचिका में कहा था कि जब तक इस याचिका का अंतिम निपटारा नहीं हो जाता, तब तक प्रतिवादी आईडीए को विवादित वरिष्ठता सूची के अनुसार भूखंडों का हस्तांतरण/आवंटन करने से रोका जा। याचिका में  संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ शुरू की गई जांच पर आवश्यक कार्रवाई करने की मांग भी की गई थी।  इसके साथ ही अब तक क्या कार्रवाई की गई है, इस बारे में स्टेट्स रिपोर्ट मंगाने की बात भी कही गई थी।

हाईकोर्ट ने दिया यह आदेश

हाईकोर्ट ने कहा कि प्रतिवादियों को नोटिस जारी किया जाए; इसके लिए प्रक्रिया शुल्क का भुगतान दस कार्य दिवसों के भीतर किया जाए और नोटिस स्पीड पोस्ट द्वारा भेजा जाए। नोटिस चार सप्ताह के भीतर वापस आने योग्य हो। यदि ऐसा नहीं किया जाता है, तो यह याचिका बिना किसी और संदर्भ के, स्वतः ही खारिज मानी जाएगी। एक अंतरिम उपाय के तौर पर, यह निर्देश दिया जाता है कि दिनांक 19.05.2026 के विवादित आदेश का क्रियान्वयन (operation) स्थगित रहेगा। आदेश अनुबंध P/4 को प्रभावी नहीं माना जाएगा, और याचिकाकर्ता के विरुद्ध कोई भी दंडात्मक (coercive) कदम नहीं उठाया जाएगा।चूंकि एक समान मामला (WP संख्या 40416/2025) भी वर्तमान मामले के मुद्दे से संबंधित है, अतः इस मामले को WP संख्या 40416/2025 और 9139/2026 के साथ सूचीबद्ध किया जाए।

सुशीला चौरसिया ने याचिका में क्या कहा था-

– दिनांक 22.03.2004 के पत्र के माध्यम से, तत्कालीन संयुक्त रजिस्ट्रार, सहकारी समितियां, इंदौर ने समिति के 80 सदस्यों की एक सूची प्रतिवादी संख्या 7 (I.D.A.) को भेजी। उक्त सूची में याचिकाकर्ता का नाम क्रम संख्या 55 पर अंकित है।

– IDA से भूखंडों के आवंटन के लिए एक नई वरिष्ठता सूची प्रकाशित की थी। विशेष रूप से, उक्त सूची में याचिकाकर्ताओं के नाम वरिष्ठता सूची से अवैध रूप से हटा दिए गए थे। उन व्यक्तियों के नाम, जो सोसाइटी के पूर्व अध्यक्ष आर.डी. शेगांवकर के साथ अच्छे संबंधों में थे, अवैध और मनमाने ढंग से उक्त सूची में शामिल कर लिए गए थे।

– प्रकाशन को देखने के बाद, वर्तमान याचिकाकर्ताओं ने मामले की जांच की और पाया कि 25.11.2024 को प्रतिवादी संख्या 4 (आशीष सेठिया और आर.एस. गारेथिया), जो विभाग के ऑडिटर थे, ने एक नई वरिष्ठता सूची प्रकाशित की थी और प्रतिवादी संख्या 6 सोसाइटी के खातों का ऑडिट किया था। उक्त ऑडिट करने से पहले और वरिष्ठता सूची तैयार करने से पहले, वर्तमान याचिकाकर्ताओं को, और साथ ही सोसाइटी के उन अन्य सदस्यों को भी, जिनके नाम अवैध रूप से हटा दिए गए थे, कोई नोटिस/सूचना जारी नहीं की गई थी।

– संयुक्त रजिस्ट्रार (सहकारी विभाग) ने जानबूझकर उपरोक्त तथ्यों की अनदेखी की और प्रतिवादी संख्या 7 – CEO, इंदौर विकास प्राधिकरण को प्लॉटों के आवंटन के लिए दिनांक 11.12.2025 का एक पत्र जारी किया, जिसके द्वारा पत्र के साथ अवैध रूप से एक नई सूची संलग्न की गई, और उसे झूठे तौर पर इस माननीय न्यायालय द्वारा अनुमोदित सूची के रूप में प्रस्तुत किया गया। विशेष रूप से, दिनांक 11.12.2025 के पत्र के साथ संलग्न सूची एक नई सूची है, जिसे दिनांक 17.04.2017 के आदेश के घोर उल्लंघन में तैयार किया गया है, और यह ऑडिट रिपोर्टों के भी घोर उल्लंघन में है।

याचिका में कई अधिकारियों की शिकायत

सुशीला चौरसिया की याचिका में सहकारिता विभाग के कई अधिकारियों की शिकायत भी की गई है। इसमें विभाग के अंकेक्षक आशीष सेठिया और आर.एस. गारेथिया की भी शिकायत है। इसके अलावा सोसाइटी के पूर्व अध्यक्ष आर.डी. शेगांवकर सहित अन्य की भी शिकायत है। याचिका में इस मामले में विभाग द्वारा अब तक की कई गड़बड़ियों का पूरा चिट्‌ठा भी है।

Harish Fatehchandani
Harish Fatehchandanihttp://www.hbtvnews.com
Harish Fatehchandani is a dedicated journalist with over a decade of experience in the media field. He is respected for his consistent and honest reporting.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Share post:

Subscribe

spot_imgspot_img

Popular

Recent News
Related

हिमाचल प्रदेश के कई जिलों में भूकंप के तेज झटके, डर के मारे घरों से बाहर निकले लोग

हिमाचल प्रदेश के शिमला सहित प्रदेश के कई जिलों में शुक्रवार रात भूकंप के झटके महसूस किए गए। यह भूकंप करीब 10:04 बजे आया, इसकी तीव्रता रिक्टर पैमाने पर 5 आंकी गई।