कलेक्टर की रोक के बावजूद जूनी इंदौर एसडीएम ने प्राइवेट व्यक्ति को दे दी सीलिंग की जमीन, इसी पर बना है चंद्र लीला होटल व गार्डन

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इंदौर। इंदौर में भूमाफिया जो भी कारनामा कर जाएं वह कम है। यहां सरकारी विभागों के साथ मिलीभगत कर बड़े-बड़े घोटालों को अंजाम दिया जाता रहा और यह सिलसिला अभी जारी है। एक ताजा मामला निपानिया का सामने आया है। इस सीलिंग की जमीन को कलेक्टर ने शासन में अधिग्रहित करने का आदेश दिया था, लेकिन जूनी इंदौर एसडीएम प्रदीप सोनी ने एक प्राइवेट व्यक्ति के आवेदन पर नक्शा संशोधन आदेश दे दिया। बताया जाता है कि इसी जमीन पर चंद्र लीला होटल व गार्डन बना हुआ है।

उल्लेखनीय है कि पूर्व कलेक्टर मनीष सिंह ने 4 नवंबर 2022 को नगर भूमि सीमा अधिनियम 1976 की धारा 19(5) तथा 20 (क) के तहत एक आदेश जारी किया था। इसमें कई जमीनों के खसरा नंबरों का उल्लेख कर कहा गया था कि इनकी सुनवाई कर गुण-दोष के आधार पर इन्हें शासन में वेष्ठित किया जाए। इस आदेश में संलग्न जमीनों की सूची में ग्राम निपनिया तहसील जूनी इंदौर की भूमि खसरा क्रमांक 279/1/1 की भूमि भी शामिल थी। इसमें सीलिंग के प्रकरण क्रमांक 4/ 90/सी 1/ 19 (5)/ 1995-96 अनुसार अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) को कहा गया था कि उपरोक्त भूमि के संबंध में भूमि सीमा अधिनियम 1976 की धारा 19(5) एवं 20 ( ) की शर्तों अनुसार भूमि को शासन में अधिग्रहीत करने का प्रस्ताव प्रस्तुत करें।

एसडीएम ने जारी कर दिया नक्शा संशोधन आदेश

इस मामले में एसडीएम जूनी इंदौर प्रदीप सोनी ने प्रकरण क्रमांक 0222/ 6 /2024-25 में ग्राम निपनिया की भूमि सर्वे नंबर 279/1/1/1 279/1/2/3 को शासन में अधिग्रहीत करने का प्रस्ताव भेजते हुए आवेदक मेसर्स कैच रियलिटी तरफे संजय पिता चंद्रगोपाल लड्डा के आवेदन पर उक्त भूमि के नक्शा संशोधन का आदेश जारी कर दिया। इसी जमीन पर चंद्र लीला होटल गार्डन बना हुआ है।

लंबे समय तक छुपा कर रखा आदेश

एसडीएम ने यह आदेश तब निकाला था, जब आशीष सिंह कलेक्टर थे, लेकिन लंबे समय तक इसे छुपा कर रखा। बाद में मौका देखते ही इसे जारी कर दिया। इतना ही नहीं पहले आदेश में कुछ गलती मिली तो दोबारा 28 मार्च 2025 को संशोधन का आदेश भी जारी कर दिया। यह जांच का विषय है कि एसडीएम सोनी ने आखिर किस दबाव में वरिष्ठ अधिकारियों के आदेश की अनदेखी करते हुए इस कार्य को अंजाम दिया है।

सोनी के पास कॉलोनी सेल का भी प्रभार

उल्लेखनीय है कि एसडीएम सोनी के पास कॉलोनी सेल का प्रभार है। सूत्र बताते हैं कि वे अपनी अधिकांश फाइलें एक फ्लैट में बैठकर निपटाते हैं। यह भी कहा जाता है कि सोनीजी वरिष्ठ अधिकारियों के नाम से भी सुपारी ले लेते हैं। सोनीजी यह दावा भी करते हैं कि कोई उनका कुछ नहीं बिगाड़ सकता। अब सवाल यह है कि आखिर सोनीजी को किसका संरक्षण प्राप्त है।

लोकायुक्त तक पहुंची है शिकायत

बताया जाता है कि इस मामले की शिकायत लोकायुक्त में भी की गई है। इसमें एसडीएम के आदेश को चुनौती देते हुए कहा गया है कि पूर्व कलेक्टर मनीष सिंह के आदेश के बावजूद एक निजी व्यक्ति के आवेदन पर सीलिंग की जमीन के मामले में कैसे फैसला ले लिया गया? एसडीएम ने इस मामले में अफसर पिता इस्माइल की आपत्ति को भी खारिज कर दिया।

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