BRICS Agriculture Meeting : इंदौर में ब्रिक्स कृषि सम्मेलन शुरू, 20 देशों के प्रतिनिधि हैं शामिल, तीन दिनों में कई मुद्दों पर होगी चर्चा

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इंदौर। इंदौर में मंगलवार से ब्रिक्स कृषि सम्मेलन की शुरुआत हो गई। सम्मेलन में ब्रिक्स सदस्य देशों और साझेदार देशों सहित करीब 20 देशों के प्रतिनिधि भाग ले रहे हैं। तीन दिनों तक चलने वाले इस महत्वपूर्ण आयोजन में कृषि क्षेत्र की उन्नत तकनीकों, नवाचार, खाद्य सुरक्षा, कृषि व्यापार और जलवायु-अनुकूल खेती जैसे विषयों पर व्यापक चर्चा की जाएगी। सम्मेलन का उद्देश्य कृषि क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने और सदस्य देशों के बीच तकनीकी एवं व्यापारिक साझेदारी को मजबूत करना है।

भारत और रूस ने तलाशी संभावनाएं

सम्मेलन में भारत और रूस के प्रतिनिधियों के बीच बैठक हुई। इस दौरान दोनों देशों के बीच कृषि व्यापार को और बढ़ाने की संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा की गई। बैठक में कृषि विकास, आधुनिक तकनीकों के आदान-प्रदान और कृषि क्षेत्र में तकनीकी सहयोग को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया गया। दोनों देशों के प्रतिनिधियों ने कृषि क्षेत्र में साझा प्रयासों को बढ़ावा देने पर सहमति जताई।

कृषि मंत्रियों की बैठक भी होगी

ब्रिक्स सदस्य देशों और साझेदार देशों सहित लगभग 20 देशों के प्रतिनिधि सम्मेलन में शामिल हुए हैं। इंदौर में मंगलवार से शुरू हुआ यह सम्मेलन 11 जून तक चलेगा। इस दौरान ब्रिक्स देशों के कृषि कार्य समूह की विभिन्न बैठकें आयोजित की जाएंगी। वहीं 12 और 13 जून को कृषि मंत्रियों की मंत्रीस्तरीय बैठक आयोजित होगी, जिसमें सदस्य देशों के मंत्री कृषि क्षेत्र से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श करेंगे।

खाद्य सुरक्षा और कृषि सहयोग को प्राथमिकता

इस सम्मेलन में खाद्य सुरक्षा, पोषण, कृषि व्यापार एवं सहयोग, जलवायु-अनुकूल और सतत कृषि विकास जैसे मुद्दों को प्रमुखता दी गई है। इसके अलावा कृषि और खाद्य प्रणालियों में नवाचार, आधुनिक तकनीकों के उपयोग तथा सदस्य देशों के बीच साझेदारी को मजबूत बनाने पर भी विशेष चर्चा की जा रही है।

कृषि क्षेत्र की चुनौतियों पर चर्चा

 पहले सत्र में जलवायु परिवर्तन के दौर में कृषि क्षेत्र की चुनौतियों और लचीली खेती (रेजिलिएंट फार्मिंग) पर विशेषज्ञों ने अपने विचार रखे। विशेषज्ञों ने कहा कि जलवायु परिवर्तन का सबसे अधिक प्रभाव कृषि क्षेत्र पर पड़ रहा है। बदलते मौसम और प्राकृतिक आपदाओं के कारण किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। ऐसे में कृषि अनुसंधान, नई तकनीकों और जलवायु-अनुकूल खेती को बढ़ावा देने की आवश्यकता है, ताकि किसानों को होने वाले नुकसान को कम किया जा सके।

कृषि कार्य समूह की बैठकों का दौर शुरू

मंगलवार सुबह से ब्रिक्स कृषि कार्य समूह की बैठकों का सिलसिला शुरू हुआ, जो देर शाम तक जारी रहा। आगामी तीन दिनों तक विशेषज्ञ कृषि व्यापार, खाद्य सुरक्षा, किसानों की आय बढ़ाने के उपाय, कृषि अनुसंधान और तकनीकी सहयोग जैसे विषयों पर विस्तृत चर्चा करेंगे। बैठकों में तैयार किए गए प्रस्तावों को सदस्य देशों के प्रतिनिधियों के साथ साझा किया जाएगा।

9 से 11 जून तक कृषि कार्य समूह की बैठक

सम्मेलन की शुरुआत 9 जून से कृषि कार्य समूह की बैठकों के साथ होगी। तीन दिनों तक विभिन्न देशों के अधिकारी और विशेषज्ञ खाद्य सुरक्षा, पोषण, कृषि व्यापार, पशुपालन, मत्स्य पालन, कृषि अनुसंधान और किसानों की आय बढ़ाने जैसे मुद्दों पर चर्चा करेंगे बैठकों में विशेष रूप से छोटे और सीमांत किसानों की चुनौतियों, कृषि ऋण, बाजार तक पहुंच और आधुनिक तकनीकों के उपयोग पर फोकस रहेगा।

12 जून को मंत्री स्तरीय संवाद

कृषि मंत्रियों का विशेष संवाद आयोजित होगा। इसका विषय होगा ‘लघु किसानों, महिलाओं एवं युवाओं के माध्यम से भविष्य की खाद्य सुरक्षा’। इस सेशन में कृषि क्षेत्र में महिलाओं और युवाओं की भूमिका, डिजिटल तकनीकों का उपयोग, जलवायु अनुकूल कृषि पद्धतियां और टिकाऊ खेती के मॉडल पर विचार-विमर्श किया जाएगा।

13 जून को कृषि मंत्रियों की होगी बैठक

ब्रिक्स देशों के कृषि मंत्रियों की मुख्य बैठक होगी। इसमें सदस्य देशों के बीच कृषि सहयोग को मजबूत करने, खाद्य हानि कम करने, जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों से निपटने और कृषि क्षेत्र में नवाचार को बढ़ावा देने पर चर्चा होगी। बैठक के अंत में साझा सहमति और सुझावों को लेकर एक महत्वपूर्ण दस्तावेज भी तैयार किया जाएगा।

Harish Fatehchandani
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Harish Fatehchandani is a dedicated journalist with over a decade of experience in the media field. He is respected for his consistent and honest reporting.

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