डीपफेक पर सख्ती: 20 फरवरी से लागू होंगे नए सूचना प्रौद्योगिकी संशोधन नियम 2026
इंटरनेट माध्यमों पर कृत्रिम बुद्धिमत्ता से तैयार किए गए डीपफेक और भ्रामक सामग्री के बढ़ते दुरुपयोग को देखते हुए केंद्र सरकार 20 फरवरी से सूचना प्रौद्योगिकी संशोधन नियम 2026 लागू करने जा रही है। इन नियमों का उद्देश्य डिजिटल मंचों पर फैल रही झूठी और छेड़छाड़ की गई सामग्री पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करना है।
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विशेषज्ञों का कहना है कि सोशल मीडिया के गणनात्मक सूत्र (एल्गोरिदम) अत्यधिक वास्तविक दिखने वाली कृत्रिम बुद्धिमत्ता से तैयार सामग्री को अधिक बढ़ावा देते हैं, क्योंकि ऐसे सामग्री पर लोगों की प्रतिक्रिया और सहभागिता अधिक होती है। चूंकि एक्स, इंस्टाग्राम और फेसबुक जैसे मंच उपयोगकर्ताओं की सक्रियता पर आधारित हैं, इसलिए सनसनीखेज और भ्रामक वीडियो तेजी से प्रसारित हो जाते हैं।
हाल के समय में जियोर्जिया मेलोनी से लेकर अजमा बुखारी तक डीपफेक वीडियो का शिकार हो चुकी हैं। जिस तेजी से कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित उपकरणों का दुरुपयोग बढ़ रहा है, उससे विशेषकर महिलाओं और बच्चों को डिजिटल जगत में उत्पीड़न का सामना करना पड़ रहा है।
सरकार का मानना है कि नए नियमों के माध्यम से सोशल मीडिया कंपनियों की जवाबदेही तय की जाएगी और झूठी, भ्रामक तथा छेड़छाड़ की गई सामग्री के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।



