चीन की  विशाल बांध परियोजना: भारत के लिए नई चुनौतियां

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चीन की विशाल बांध परियोजना: भारत के लिए नई चुनौतियां

चीन तिब्बत पठार के पूर्वी हिस्से में दुनिया का सबसे बड़ा बांध बनाने जा रहा है, जो भारत और बांग्लादेश के लिए कई रणनीतिक और पर्यावरणीय चिंताएं पैदा कर सकता है। यह बांध यारलुंग जांगबो नदी (भारत में ब्रह्मपुत्र) पर बनेगा और हर साल 300 बिलियन किलोवाट-घंटे (केडब्ल्यूएच) बिजली उत्पन्न करेगा।

भारत और बांग्लादेश की चिंताएं
इस परियोजना से भारत में पानी की आपूर्ति और बाढ़ प्रबंधन को लेकर गंभीर समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। अरुणाचल प्रदेश की ओर मुड़ने वाली ब्रह्मपुत्र नदी पर चीन के इस बांध से पानी का प्रवाह नियंत्रित होगा, जिससे भारत के निचले इलाकों में पानी की कमी हो सकती है।

चीन की प्रतिक्रिया
चीन ने इस परियोजना का बचाव करते हुए कहा कि यह निचले इलाकों के लिए नुकसानदायक नहीं होगी और सुरक्षा से जुड़े सभी मुद्दों का समाधान किया गया है। हालांकि, परियोजना के बारे में चीन द्वारा जानकारी साझा न करने से भारत की चिंताएं और बढ़ गई हैं।

परियोजना की लागत और प्रभाव
137 बिलियन डॉलर की लागत वाली यह परियोजना चीन की 14वीं पंचवर्षीय योजना का हिस्सा है और इसे दुनिया की सबसे बड़ी ढांचागत परियोजनाओं में गिना जा रहा है। भारत को डर है कि इस परियोजना के जरिए चीन पानी के प्रवाह को नियंत्रित कर सकता है, जो युद्ध या तनाव की स्थिति में रणनीतिक दबाव बना सकता है।

भारत का जवाब और संभावित तनाव
भारत भी अरुणाचल प्रदेश में ब्रह्मपुत्र पर अपना बांध बना रहा है। 18 दिसंबर को भारत और चीन के विशेष प्रतिनिधियों की बैठक हुई थी, जिसमें आंकड़ों को साझा करने और जल प्रबंधन पर चर्चा की गई थी।

यह बांध परियोजना भारत-चीन संबंधों में जल संघर्ष की संभावना बढ़ा सकती है और दोनों देशों के बीच पहले से मौजूद तनाव को और गहरा कर सकती है।

Abhilash Shukla (Editor)
Abhilash Shukla (Editor)http://www.hbtvnews.com
Abhilash Shukla is an experienced editor with over 28 years in journalism. He is known for delivering balanced, impactful, and credible news coverage.

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